गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

प्रेरणा

आज मैं भी इस बड़े और अभिव्यक्ति के स्वतंत्र मंच पर अपने आप को काफी गौरवान्वित और आप सब के काफी नजदीक पाकर अपने आप को बड़ा धन्य मान रहा हू.......

इस सब के पीछे हमारे प्रेरणा स्त्रोत रहे आदरणीय फूफा जी , जो कि लगातार पिछले कई वर्षो से इस छेत्र  के सशक्त स्तम्भ रहे है  और आपने अभिव्यक्ति के इस रूप को उन लोगो , या   उन चीजो के बारे में लिखा जो आम लोगे की आम नजर से दूर रहती है  और न जाने कई ऐसी निर्जीव कही जाने वाली वस्तुओ में सजीवता डाल दी......................

आज आप जिस हिम्मत के साथ , मुस्किल समय में एक शानदार निर्णय के साथ , आगे  बढे और इस संकट की घडी में अपने आप पर किसी भी तरह का तनाव हावी न  होने दिया.......

दमोह आने का निर्णय एक तरह का उदाहरण है कि इतने कम समय में कैसे परिस्तिथियों को बिना हावी हुए एक उपयोगी निर्णय लिया जा सकता हे ..............

आप सदा ही  हमारे लिए प्रेरणा रहे है............


मुस्कुराते हुये

तुम्हे मुस्कुराते हुये देखना  और देखते रहना  मुझे आनंदित करता है  मुस्कुराते हुए जब तुम्हारी आँखें  थोड़ी सी बड़ी हो जाती हैं  और जब तुम्हारी ...