बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

प्रिय छात्र नेताओ

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रिय छात्र नेताओ,

देश के सर्वोच्च शिक्षा संस्थान में पढने का गौरव प्राप्त है आप इस के लिए बधाई के पात्र है। हम तो सपने में भी कभी वहां पहुचने की नहीं सोच सकते। इसी विश्व विद्यालय से देश के तमाम नामचीन नेता निकले है जिनके नाम बड़े और दर्शन दुर्लभ है। खास कर अपने क्षेत्र में। आप लोग भी वही से राजनीती शुरू कर रहे है पर आप से निवेदन है आप वह न करे जो उन्होंने देश के साथ किया है। मुझे दिल्ली से 1000 कि. मी. दूर बैठकर नहीं पता क्या सही है या गलत । कौन सही है ?? यह भी नहीं पता . . । 
वहां पर हो रही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाना बहुत जरुरी है लेकिन हर बार मार-पीट ठीक नहीं। किसी भी तरह के हक़ या न्याय के लिए हिंसा कभी भी सही माध्यम नहीं है।  यदि आप सही में बदलाव लाना चाहते हो तो, तब आप मौन क्यों हो जाते हो जब सत्ता पक्ष और विपक्ष महीने भर सदन चलने नहीं देता। शायद इसलिए कि आप को हुडदंग करने के लिए चंदा सफ़ेद खादी में बैठे हुए काले लोग देते है। वृताकार परिसर (संसद) में बैठे हुए लगभग 750 लोग राष्ट्र हित में काम करने लगे तो आप को इस तरह सड़को पर उतरने की जरुरत न पड़े। जब कोई नेता घटिया बयान देता है तब कहाँ जाती है आप की राष्ट्र भक्ति? शायद तब कोई पार्टीपति आप को लजीज कबाब और विदेशी शराब थमाँ जाता होगा । हम सभी जानते है एक बार भीष्म और द्रोण जैसे मनीषियों का मौन का परिणाम एक युद्ध की परिणति के रूप में हुआ था आज हमारे देश न जाने कितने भीष्म मौन साधना में लगे है। जिनको न्याय करना है सत्य और असत्य का निर्णय करना है में मूक दर्शक बने हुए है  तब शांत क्यों थे जब व्यापम की पोल खुल रही थी जब कहाँ गया था आप का जनआक्रोश ?? शायद तब आप की पार्टी के बड़े नेता के छोटे बेटे फसते नजर आ रहे होंगे।सस्ती लोकप्रियता आप को मशहूर बना सकती है पर मजबूत नहीं।
देश के तमाम छात्र नेता आप का अनुशरण करते है आप उनको क्या सन्देश देना चाहते है। झुण्ड बनाकर पुलिस की गाड़ी फुकना और निहतथे प्रोफेसरों को मरना लोकतंत्र है तो मुझे ऐसे लोकतंत्र की कोई आवश्यकता नहीं है। लोकतंत्र आप को किसी को मारने की इजाजत नहीं देता। आप आवाज उठाये, हम स्वर देंगे और जमकर देंगे। तब कहाँ चले जाते है रवीश जी, विनोद दुआ जी, सरदेसाई जी, मेडम बरखा दत्त जी. सत्ता के तलुए चाटती पत्रकारिता यदि आवाज न सुने तो सोशल मिडिया को आवाज बनाये। कहाँ है महान चिन्तक विचारक पुरुष्कार बापसी वाले राष्ट्रभक्त भारतीय। आप यदि देश में राष्ट्र्वाद चाहते है तो भगतसिंह , चंद्रशेखर, नेता जी सुभाषचन्द्र, लेनिन आदि क्रांतिकारियो के विचारो को सार्वजनिक करे देश में एक नई विचारधारा निकलेगी।
-अनिमेष सिंघई

नोट: में किसी भी तरह का भाजपाई, कांग्रेसआई, सपाई,बसपाई,संघाई, या आपापाई नहीं हूँ।

मुस्कुराते हुये

तुम्हे मुस्कुराते हुये देखना  और देखते रहना  मुझे आनंदित करता है  मुस्कुराते हुए जब तुम्हारी आँखें  थोड़ी सी बड़ी हो जाती हैं  और जब तुम्हारी ...