रविवार, 30 दिसंबर 2012

हमें बदलना होगा


आज   पूरा  देश  महिलाओ पर हो रहे आत्याचारो के खिलाफ एकजुट है . जंतर मंतर से जगह जगह तक ...
उस एक लड़की के लिए जो जिन्दगी से जंग हार गई है पर न जाने कितनी लडकियों के लिए होसले और संगर्ष की मिशाल बन कर  गई है हमारे बीच से !  ऐसा जनांदोलन न तो कभी देखा न सुना।।   ऐसा जन समर्थन न तो कोई "प्रियदर्शनी" जुटा पाई।। न ही गाँव गाँव जाकर कोई  " युवा ह्रदय सम्राट "  इस  देश  एक प्रकाश आया तो लेकिन उस को "लोकनायक" बनते -बनते  देर हो गई। अयोध्या  की घटना के बाद भारत की राजनीती मैं कई सन्यासी कई महापुरुष आये . लेकिन गंगा सा पवित्र तो कर ना  सके  वल्कि गंगा की राजनीती कर उसे भी आपवित्र कर दिया . कितने दुर्भाग्य की बात है की उस लड़की के लिए इंसाफ मागने पूर्व थल सेना  अध्यक्ष  जब  इंडिया गेट पहुचे तो उन पर दंगा भरकाने का केस दर्ज कर दिया गया . हमें अपनी सरकार पर गर्व होना चाहिए कि कल तक जिन हाथो मैं देश की सुरक्षा की सारी  जिम्मेदारी वो ही आज देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो गये .! यदि ये सेना अध्यक्ष हमारे पडोसी मुल्क से होते तो पुरे देश मैं सेना सासन होता !http://www.facebook.com/l.php?u=http%3A%2F%2Fanimeshsinghai.blogspot.in%2F2012%2F12%2Faakhir-kon.html%3Fspref%3Dfb%23!%2F&h=FAQENqUgp
                                                           जो लोग ये सोच रहे है की इन प्रदर्शन कारियों का कोई प्रमुख नही है वो इस भुल  मैं है . इस पूरे नवजागरण आन्दोलन की एक मात्र नेत्रत्वकरता  वो गुमनाम और बहादुर लड़की है जो निरंतर हॉस्पिटल से इस आन्दोलन का नेत्रत्व कर रही थी ! जिसको सरकार के कुछ लोगो ने पहचन लिया और उस को देश के बाहर भेज दिया। और उस ने  अपना आक्रोश इस सरकार और व्यस्था के विरुद्ध इन हजारो युवक और युवतीयो के माध्यम से देश के कोने कोने तक पहुचाया। हमारे हुक्मरान इस बात को  पहचानने मे कुछ हद तक गलती कर गये।
                                          मेडिकल की एक छात्रा  न जाने कैसे कुछ ही दिनों में हर हिंदुस्तानी परिवार  की  बेटी , हर युवा की बहन और दोस्त बन गई। और लोगो के दिलो दिमाग में हजारो सवाल दे कर गई है जिन के जवाब किसी के पास नही है। लेकिन उन को तैयार करने के जिम्मेदारी देश के 60% युवाओ पर है  जिन पर 2020 तक अब्दुल कलम के भारत बनाने का दारोमदार है जो की 2020 मैं पूरे विश्व का नेत्रत्व करेगा। अब हम लोगो को सोचना है की यह कैसे संभव है और हमें अपना नेत्रत्व किन हांथो में  देना है।
                                   हमें  अपनी वर्तमान सरकार से कुछ भी आशा नै करने होगी वल्कि स्वयं समाज में जाग्रति लाने का प्रयास करना होगा।  हमारे समाज के लोग मानते तो राम को है पर चरित्र रावण से भी ख़राब।
गाय को इस देश में माँ कहा जाता है और न जाने कीने माई रोज सरकारी कत्लखानो में  कट जाती है इस माँ में सवा करोर देवी देवता हर समय निवास करते हैं जिनमें  कन्या भी एक रूप है
पूजते तो गंगा को है पर न जाने कितनी गंगा देश के अलग अलग स्थानों पर मैली होती जा रहे है। हमारे समाज में लडकियों को पूज्य माना गया है तो फिर भी हमारे समाज के ये दरिन्दे अपनी हरकतों से बाज नही आते। अब हमारे मंदिरों के पुजारियों , मस्जिद के मोलानो , गुरूद्वारे के ग्रंथि , पादरी , फादर और देश के खापो के सरपंचो को अपने स्तर से प्रयास करना होगा।

                                                  हमारे सरकार में बैठे 3-3 बेटियों के बापूओ को 10-10 दिन के बाद होश आया की 10 जनपथ , 7 रेस कोर्स रोड़, और सरकारी भवनों से 2-2  लाइन वोलने से कुछ नि होगा। वैसे परम आदरनीय राजमाता श्री मति गाँधी ने कुछ प्रदर्शन करियो से  मिलकर बहुत बड़ी किरपा की है हम सब पर पूरा देश उन् का आभारी है की जिन के पास अपने पार्टी के नेताओ से मिलने का समय नही उन ने कुछ आन्दोलन कारियों  से मिलकर बड़ा यहसान कर दिया।
                                                         हम उस दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रभु से प्राथना करते है और अपने लिए  संवल की मांग करते है ताकि आने वाले समय में ऐसी घटनाओ से बचा जा समाज को  बचाया जा सके।



शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

AAKHIR KON...???

आज जब दिल्ही  में हुई घटना के बारे में सोचता हूँ तो अपने आप को बहुत विबश और कमजोर महसूस करने
लगता हूँ ! में ये जनता हूँ कि  अपराधियो को जो भी और  जितना भी दंड दिया  जाए कम  है . . . .कानून में बदलाव और उस के पालन की सक्त  आवयकता है . ऐसा  नहीं कि इस घटना के पहले और कोई घटना
नहीं घटी ... पर ये घटना जिस क्रम तरीके से घटी उस ने पूरे देश में एक वैचारिक क्रांति और लोगो को इस विषय पर अपने विचार रखने के लिए फेसबुक और ट्विटर जैसे सामाजिक संचार यन्त्र और मीडिया को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सही दिशा में उपयोग  करने का पूरा मौका दिया।
                                           यह घटना लोकतंत्र के संरक्षकों ( पोलिस, सरकार ,राजनेतिक दल , सामाजिक संगठन , शिक्षा व्यावस्था , धार्मिक शिक्षा , नैतिक शिक्षा ,और आम आदमी  ) पर किया गया एक सफल आक्रमण है ! जिस से इन मैं से कोई भी अपने आप को बचा नही सक्ता।।।। सभी  इस घटना के सामूहिक जिम्मेदार है ! सिर्फ  पोलिश और सरकार पर इस की पूरी जिम्मेदारी डाल देने से कोई समाधान नही
 निकलेगा ! जब तक हम इस की सामूहिक ज़िम्मेदारी नहीं स्वीकार करेगे .
                                         हमारे देश के युवाओ को देश का आर्थिक पतन  तो जल्दी ही  नजर आ जाता है और उनको देश में निरंतर हो रहा नैतिक पतन नजर नही आ रहा वल्कि यदि कोई उनसे इस विषय पर बात करे तो उनको पुराने विचारो  बाला बता कर अपमानित किया जाता है हम ने अपने स्वतंत्र होने का जितना उपयोग नही किया उस से कही ज्यादा उस के लिए सघर्ष करने वालो की आत्मा को दुःख पहुचाया है !!
                                  कुछ दिनों पहले मेने एक समाचार  पत्र में एक विदेशी दार्शनिक का विचार पड़ा था जो की कुछ हदों तक सही प्रतीत होती है  "" आज कल विश्वविद्यालयो और शिक्षा संस्थनो से पडे लिखे जाहिल निकल रहे हें " ये लाइन आप के विचार के लिए है !!!        
                                  
  श्री  राम  पूजक इस  समाज में  न जाने रामसिंह  जैसे दुराचारियो को कहा से जगह  मिल सकती है ! ये इस देश का दुर्भाग्य है के श्री राम जैसे आदर्श पुरुष हमारे पूजा घरो मंदिरों  तक ही सीमित रह गये  है .! लडकियो मैं दुर्गा के नव रूप , सीता सती और सावित्री के दर्शन करने वाले ये अति धार्मिक लोग ना जाने हैवानियत की हदे कैसे पार कर जाते है !
                                            मेरा अपना मानना है की इस समाज के लोग यदि श्री राम को भगबान की तरह पूजने की आपेक्षा उन को आदर्श मान कर आनुकरण करे तो शायद आने वाले समय मे इस प्रकार की  घटनाओ से छुटकारा पा सकते है! मंदिर में जाकर  चरण पकड़ने से ज्यादा वह्तर है की अपने दिमाग मे उनके
आचरण को स्थान दे ....
                                   जब तक लोग महिलाओ को देखने का नजरिया नही बद्लेगे तो शायद इस प्रकार कि
घटनाओ से समाज को नही बचाया जा सकता ! यदि रास्ते से कोई लड़की निकल जय तो लोगो की आँखे बॉडी स्कैनर (body Secaner) की तरह काम  करने लगती है , हमें अपने आदर्शो , युग निर्माताओ , वलिदनियो , और कमसे कम अपने आप को आत्म ग्लानी से बचने के प्रयाश करने  होगे !!
                                      पूरा देश आज एक जुट है तो हमें अपनी एकता और अखंडता का सहे दिशा में उपयोग करना होगा और ऐसे दुराचारियो को सकत से सकत सजा मिलनी चाहिए ! ताकि कोई और ऐसा कृत्य  करने से पहेले 100 बार सोचे !




मुस्कुराते हुये

तुम्हे मुस्कुराते हुये देखना  और देखते रहना  मुझे आनंदित करता है  मुस्कुराते हुए जब तुम्हारी आँखें  थोड़ी सी बड़ी हो जाती हैं  और जब तुम्हारी ...