शुक्रवार, 12 मार्च 2021

मुस्कुराते हुये


तुम्हे मुस्कुराते हुये देखना 
और देखते रहना 
मुझे आनंदित करता है 
मुस्कुराते हुए जब तुम्हारी आँखें 
थोड़ी सी बड़ी हो जाती हैं 
और जब तुम्हारी पुतलियां 
काजल से टकराती है 
तो लगता है जैसे 
सृष्टि ने रात को सुबह,
शाम को रात कर दिया हो.
तुम्हारे बिना 
ये राते,ये दिन, ये सुबह, ये शाम 
मुझे अच्छी नहीं लगती 
अतः मैं चाहूंगा 
किसी दिन तुम 
अचानक, मुस्कुराती हुई 
मेरे पास चली आओ !
तुम्हारा मुस्कुराता हुआ चेहरा 
मन के घनघोर अँधेरे में 
उम्मीद की एक रौशनी पैदा करता है। 
मैं जानता हूँ,
तुम ! अथाह विपत्तियों और मुश्किलों में भी 
मुस्कुराने का हुनर जानती हो 
मगर मैं चाहूंगा ! 
तुम जब भी मुझसे मिलो 
अपना सारा हुनर उस तिजोरी में
बंद करके आना जिसमे  
हमारी यादें साँसे ले रही हैं। 
और आते वक़्त 
कुछ यादों के बंडल ले आना 
ताकि तुम्हारे साथ 
खिलखिलाकर अपना वक़्त बिताया जा सके 
क्यों की मुझे तुम्हारे साथ
मुस्कुराना नहीं, खिलखिलना है। 
 




मुस्कुराते हुये

तुम्हे मुस्कुराते हुये देखना  और देखते रहना  मुझे आनंदित करता है  मुस्कुराते हुए जब तुम्हारी आँखें  थोड़ी सी बड़ी हो जाती हैं  और जब तुम्हारी ...