आज जब दिल्ही में हुई घटना के बारे में सोचता हूँ तो अपने आप को बहुत विबश और कमजोर महसूस करने
लगता हूँ ! में ये जनता हूँ कि अपराधियो को जो भी और जितना भी दंड दिया जाए कम है . . . .कानून में बदलाव और उस के पालन की सक्त आवयकता है . ऐसा नहीं कि इस घटना के पहले और कोई घटना
नहीं घटी ... पर ये घटना जिस क्रम तरीके से घटी उस ने पूरे देश में एक वैचारिक क्रांति और लोगो को इस विषय पर अपने विचार रखने के लिए फेसबुक और ट्विटर जैसे सामाजिक संचार यन्त्र और मीडिया को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सही दिशा में उपयोग करने का पूरा मौका दिया।
यह घटना लोकतंत्र के संरक्षकों ( पोलिस, सरकार ,राजनेतिक दल , सामाजिक संगठन , शिक्षा व्यावस्था , धार्मिक शिक्षा , नैतिक शिक्षा ,और आम आदमी ) पर किया गया एक सफल आक्रमण है ! जिस से इन मैं से कोई भी अपने आप को बचा नही सक्ता।।।। सभी इस घटना के सामूहिक जिम्मेदार है ! सिर्फ पोलिश और सरकार पर इस की पूरी जिम्मेदारी डाल देने से कोई समाधान नही
निकलेगा ! जब तक हम इस की सामूहिक ज़िम्मेदारी नहीं स्वीकार करेगे .
हमारे देश के युवाओ को देश का आर्थिक पतन तो जल्दी ही नजर आ जाता है और उनको देश में निरंतर हो रहा नैतिक पतन नजर नही आ रहा वल्कि यदि कोई उनसे इस विषय पर बात करे तो उनको पुराने विचारो बाला बता कर अपमानित किया जाता है हम ने अपने स्वतंत्र होने का जितना उपयोग नही किया उस से कही ज्यादा उस के लिए सघर्ष करने वालो की आत्मा को दुःख पहुचाया है !!
कुछ दिनों पहले मेने एक समाचार पत्र में एक विदेशी दार्शनिक का विचार पड़ा था जो की कुछ हदों तक सही प्रतीत होती है "" आज कल विश्वविद्यालयो और शिक्षा संस्थनो से पडे लिखे जाहिल निकल रहे हें " ये लाइन आप के विचार के लिए है !!!
श्री राम पूजक इस समाज में न जाने रामसिंह जैसे दुराचारियो को कहा से जगह मिल सकती है ! ये इस देश का दुर्भाग्य है के श्री राम जैसे आदर्श पुरुष हमारे पूजा घरो मंदिरों तक ही सीमित रह गये है .! लडकियो मैं दुर्गा के नव रूप , सीता सती और सावित्री के दर्शन करने वाले ये अति धार्मिक लोग ना जाने हैवानियत की हदे कैसे पार कर जाते है !
मेरा अपना मानना है की इस समाज के लोग यदि श्री राम को भगबान की तरह पूजने की आपेक्षा उन को आदर्श मान कर आनुकरण करे तो शायद आने वाले समय मे इस प्रकार की घटनाओ से छुटकारा पा सकते है! मंदिर में जाकर चरण पकड़ने से ज्यादा वह्तर है की अपने दिमाग मे उनके
आचरण को स्थान दे ....
जब तक लोग महिलाओ को देखने का नजरिया नही बद्लेगे तो शायद इस प्रकार कि
घटनाओ से समाज को नही बचाया जा सकता ! यदि रास्ते से कोई लड़की निकल जय तो लोगो की आँखे बॉडी स्कैनर (body Secaner) की तरह काम करने लगती है , हमें अपने आदर्शो , युग निर्माताओ , वलिदनियो , और कमसे कम अपने आप को आत्म ग्लानी से बचने के प्रयाश करने होगे !!
पूरा देश आज एक जुट है तो हमें अपनी एकता और अखंडता का सहे दिशा में उपयोग करना होगा और ऐसे दुराचारियो को सकत से सकत सजा मिलनी चाहिए ! ताकि कोई और ऐसा कृत्य करने से पहेले 100 बार सोचे !
लगता हूँ ! में ये जनता हूँ कि अपराधियो को जो भी और जितना भी दंड दिया जाए कम है . . . .कानून में बदलाव और उस के पालन की सक्त आवयकता है . ऐसा नहीं कि इस घटना के पहले और कोई घटना
नहीं घटी ... पर ये घटना जिस क्रम तरीके से घटी उस ने पूरे देश में एक वैचारिक क्रांति और लोगो को इस विषय पर अपने विचार रखने के लिए फेसबुक और ट्विटर जैसे सामाजिक संचार यन्त्र और मीडिया को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सही दिशा में उपयोग करने का पूरा मौका दिया।
यह घटना लोकतंत्र के संरक्षकों ( पोलिस, सरकार ,राजनेतिक दल , सामाजिक संगठन , शिक्षा व्यावस्था , धार्मिक शिक्षा , नैतिक शिक्षा ,और आम आदमी ) पर किया गया एक सफल आक्रमण है ! जिस से इन मैं से कोई भी अपने आप को बचा नही सक्ता।।।। सभी इस घटना के सामूहिक जिम्मेदार है ! सिर्फ पोलिश और सरकार पर इस की पूरी जिम्मेदारी डाल देने से कोई समाधान नही
निकलेगा ! जब तक हम इस की सामूहिक ज़िम्मेदारी नहीं स्वीकार करेगे .
हमारे देश के युवाओ को देश का आर्थिक पतन तो जल्दी ही नजर आ जाता है और उनको देश में निरंतर हो रहा नैतिक पतन नजर नही आ रहा वल्कि यदि कोई उनसे इस विषय पर बात करे तो उनको पुराने विचारो बाला बता कर अपमानित किया जाता है हम ने अपने स्वतंत्र होने का जितना उपयोग नही किया उस से कही ज्यादा उस के लिए सघर्ष करने वालो की आत्मा को दुःख पहुचाया है !!
कुछ दिनों पहले मेने एक समाचार पत्र में एक विदेशी दार्शनिक का विचार पड़ा था जो की कुछ हदों तक सही प्रतीत होती है "" आज कल विश्वविद्यालयो और शिक्षा संस्थनो से पडे लिखे जाहिल निकल रहे हें " ये लाइन आप के विचार के लिए है !!!
श्री राम पूजक इस समाज में न जाने रामसिंह जैसे दुराचारियो को कहा से जगह मिल सकती है ! ये इस देश का दुर्भाग्य है के श्री राम जैसे आदर्श पुरुष हमारे पूजा घरो मंदिरों तक ही सीमित रह गये है .! लडकियो मैं दुर्गा के नव रूप , सीता सती और सावित्री के दर्शन करने वाले ये अति धार्मिक लोग ना जाने हैवानियत की हदे कैसे पार कर जाते है !
मेरा अपना मानना है की इस समाज के लोग यदि श्री राम को भगबान की तरह पूजने की आपेक्षा उन को आदर्श मान कर आनुकरण करे तो शायद आने वाले समय मे इस प्रकार की घटनाओ से छुटकारा पा सकते है! मंदिर में जाकर चरण पकड़ने से ज्यादा वह्तर है की अपने दिमाग मे उनके
आचरण को स्थान दे ....
जब तक लोग महिलाओ को देखने का नजरिया नही बद्लेगे तो शायद इस प्रकार कि
घटनाओ से समाज को नही बचाया जा सकता ! यदि रास्ते से कोई लड़की निकल जय तो लोगो की आँखे बॉडी स्कैनर (body Secaner) की तरह काम करने लगती है , हमें अपने आदर्शो , युग निर्माताओ , वलिदनियो , और कमसे कम अपने आप को आत्म ग्लानी से बचने के प्रयाश करने होगे !!
पूरा देश आज एक जुट है तो हमें अपनी एकता और अखंडता का सहे दिशा में उपयोग करना होगा और ऐसे दुराचारियो को सकत से सकत सजा मिलनी चाहिए ! ताकि कोई और ऐसा कृत्य करने से पहेले 100 बार सोचे !

you have raised a very valid point dear.
जवाब देंहटाएंeveryone of us have to take some real action to abolish such filthy mentality settled deep in common man's mind.
together 'we can'...
thanks for this mind opener note.