रविवार, 23 फ़रवरी 2014

है ज़िंदगी।

एक   कमरे  के  आधे  हिस्से   में  सिमट  सी  गई  है  ज़िंदगी .


तन्हाई  , रुस्वाई  पढाई  हसना  मुस्कुराना   है  बस  ज़िंदगी .


कहने  को बहुत   है  कह  न पाना  झिजक रह जाना  है  ज़िंदगी . 


आँख  बंद करना ,  तस्वीर  बनाना  और उसमे  खो जाना  है ज़िंदगी।  

 यादो में किसी  की सिमट जाना , याद  करना मुस्कुराना  है ज़िंदगी ,


खाने में ढूढ़ना माँ का प्यार , दादी का  लाड़  है  ज़िंदगी .


यू   ही बहनो से बात - बात पे लड़ना झगड़ना और  उनका  इठलाना  है ज़िंदगी। 


देर से आने  पर    ,  यू खो जाने  पर  दोस्तों का इंतज़ार है  ज़िंदगी  


अब तक समझते  थे सांस  लेना और  छोड  देना   है ज़िंदगी,   


अब  जाना है  किसी  को  खुश कर देना  है  ज़िंदगी 


रात   में   सोते  समय  सपने  बुनना   , उनमे  उलझना  , सुबह  सब भूलजाना  है ज़िंदगी।   


गाने  सुनना  , गुनगुनाना , अपने गाने  खुद बनाना   है ज़िंदगी।   

एक   कमरे  के  आधे  हिस्से   में  सिमट  सी  गई  है  ज़िंदगी .


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