मुनि क्षमासागर जी की कविताएँ
अब जब मैं कविता लिखता हूँ आकाश हँस देता है ,चिड़िया गाने लगती है और नदी मुस्कुराकर आगे बढ़ जाती है। जैसे सब पूछते हो ,कि हमारे सिवाय तुम और क्या लिखते हो ?
दाता ………
उसने
कुछ नही जोड़ा ,
लोग बताते हैं
पहनने का एक जोड़ा भी
उसके पास
नही मिला ,
जिंदगी भर अपना सब
देता रहा
दे देकर
सबको जोड़ता रहा।
आवाजें ……।
बनता
चुपचाप है ,
टूटता आवाज के साथ है।
जिंदगी के
इस दौर में
अब आवाज ही
आवाज है।
कल................
यहाँ के लोग
वक़्त के
बड़े पाबंद हैं
कल का का म
आज नही करते।
और कल ?
कल तो कभी नही आता ,
इसलिए
कभी नही करते।
यहाँ के लोग
वक़्त के
बड़े पाबंद हैं
कल का का म
आज नही करते।
और कल ?
कल तो कभी नही आता ,
इसलिए
कभी नही करते।
सावधान
दर्पण
तोड़ने से पहले
इतना
जरुर देख लेना,
कही
दर्पण में बना
तुम्हारा प्रतिबिम्ब
टूट न जाए।
सिर्फ अपने लिए
कितना
जरुरी हो जाता है
कभी कभी
आदमी को जीने के लिए
यह भरम
कि कहीं कोई है ,
जो उसके लिए
मर सकता है।
सच्चाई तब भी
वही रहती है
कि आदमी
अपने लिए जीता
और
अपने लिए
मरता है........
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