प्रथम नियम
विज्ञान कहता है जहाँ,प्रकाश है वहां ऊष्मा है
जहाँ ऊष्मा है वहाँ ऊर्जा है
वह ऊर्जा जो नष्ट नहीं होती
वह ऊर्जा जो सिर्फ रूप बदलती
ठीक हमारे रिश्तो की तरह
थोड़े से प्रकाश और ऊष्मा से
फल फूल जाते है
लेकिन जैसे ही
रूप बदलते है टूट जाते है
क्या ऊष्मा और प्रकाश उर्जा नहीं है ?
और यदि यह उर्जा है तो
रिश्ते अपना रूप बदले
रंग बदले और स्वाभाव भी
पर रहे ठीक उर्जा के
प्रथम नियम की तरह ।।
शून्य नियम
यदि कोई दो पदार्थ
किसी तीसरे के साथ
एक सामान तापमान पर है
अतः वे आपस में
एक समान उष्मीय व्यवहार करेंगे
ठीक हमारे रिश्तो की तरह
जैसे दो एक समान सोच विचार शौक
रहन सहन वाले व्यक्ति मित्र बनते हैं
और अन्य भी शीघ्र
उनके प्रभाव में आ जाते हैं
एक रूप एक स्वाभाव और
सामाजिक साम्य स्थापित करते है
ये रिश्तो का शून्य नियम है।
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